सलाह
हे पिंजरे की,ये मैना
यदि चाहता है,परम सुख तो
राम नाम,अनमोल रतन है
गया समय,नहीं आयेगा
फिर पाछे पछताएगा
भजन कर ले,राम नाम का
भवसागर पार हो जायेगा
तू महल बना,अटारी बना
कर कर जतन, सामान सजा
पल में वर्षा, आय गिरावेे
हाथ मसलत,रह जायेगा
भाई बन्धु,कुटुंब कबीला
सब संपत्ति,यही रह जायेगा
मतलब का सब खेल जगत में
पाप पुण्य ही,साथ जायेगा
हे पिंजरे की, ये मैना
यदि चाहता है,परम सुख तो
भजन कर ले, राम नाम का
भवसागर पार हो,जायेगा
तेरी दो दिन की,जिंदगानी है
काया माया तो, बादल जैसा छाया है
हरिनाम परम पावन,परम सुंदर
परम मंगल,चारो धाम है
राम नाम के,दो अक्षर में
सब सुख शांति, समाया है
जिसने भी,राम नाम गुण गाया
उसको लगे न,दुःख की छाया
हे पिंजरे की,ये मैना
यदि चाहता है,परम सुख तो
राम नाम,अनमोल रतन है
गया समय,नहीं आयेगा
फिर पाछें,पछताएगा
भजन कर ले,राम नाम का
भवसागर पार हो,जायेगा
नूतन लाल साहू
"काव्य रंगोली परिवार से देश-विदेश के कलमकार जुड़े हुए हैं जो अपनी स्वयं की लिखी हुई रचनाओं में कविता/कहानी/दोहा/छन्द आदि को व्हाट्स ऐप और अन्य सोशल साइट्स के माध्यम से प्रकाशन हेतु प्रेषित करते हैं। उन कलमकारों के द्वारा भेजी गयी रचनाएं काव्य रंगोली के पोर्टल/वेब पेज पर प्रकाशित की जाती हैं उससे सम्बन्धित किसी भी प्रकार का कोई विवाद होता है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी उस कलमकार की होगी। जिससे काव्य रंगोली परिवार/एडमिन का किसी भी प्रकार से कोई लेना-देना नहीं है न कभी होगा।" सादर धन्यवाद।
नूतन लाल साहू
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