*मुक्तक*
*ये बाट कौन सी*
भाव उर में प्रवर प्रेम शब्दों में भर, लेखनी तव गढ़े क्या श्रृंगार ये ।
दृग मदिर अधखुले नेह उर में पले, तिय अधर पिय पढ़े क्या उद्गार ये।।
स्वप्न दिन में दिखें गीत प्रणयन लिखें, अंध पथ पग बढ़े ये बाट कौन सी,
कोई सुने जो कहे प्रीत पिऊ संग बहे, हम विलोमित लड़े क्या प्रतिकार ये।।
*प्रखर दीक्षित*
*फर्रुखाबाद*
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