सुनीता असीम

बोहोत हुई कान्हा अब मनमानी है।


अपने दिल की तुझको टीस दिखानी है।


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दिल में मेरे बंशी बजती तेरी हरदम।


कह दे तेरी मेरी ये प्रीत पुरानी है।


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माना मैंने मनमोहक चितवन तेरी।


छलती मेरे जी को और सुहानी है।


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तैयार करो खुद को सांवरिया मेरे।


डोली मेरी तुमको सिर्फ उठानी हो


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लब पर तेरे मुस्कान अनोखी देखी।


उससे ही तो मन में जोत जगानी है।


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सुनीता असीम


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